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तर्पण कर्मकांड में न केवल अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति की जाती है बल्कि सारे प्राणी जगत की तुष्टि का संदेश भी उसमे सन्निहित है । जो हमारे परिवार का हिस्सा हो या न हो उन्हे भी तृप्त करने हेतु इसमें विधान है । भीष्म तर्पण के माध्यम से ऐसे महापुरषों का जिन्होंने देश, धर्म संस्कृति की रक्षा हेतु अपना परिवार नही बनाया और अपने प्राणों की आहुति दी। भीष्म उनके प्रतीक है,
विवेकानंद ,भगत सिंह आदि लाखों बलिदानियों को भी शक्तिपीठों में तर्पण जलांजलि दी जा रही है।

प्रकृति के समग्र संरक्षण हेतु पंचबली में गौ बलि ( गौ वंश जो कि कभी भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार था)

कुक्कुरबली( कर्तव्यनिष्ठा एवम स्वामी भक्त लोगो के संरक्षण की शिक्षा,)
काकबली( परोक्ष रूप से वृक्ष रोपण करके प्रकृति एवम पर्यावरण का संतुलन बनाने वाले पक्षियों का संरक्षण करने)
पिपिलिकाबली( श्रमनिष्ठा एवम भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले जीव जंतुओं का संरक्षण का संदेश देने का क्रम संपन्न होता है)

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