Hapur News हापुड़ में विधायक को चाय पर बुलाकर अपमानित करने का मामला तूल पकड़ रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई है और विधायक को लखनऊ बुलाया है। बीडीओ की पेशी विधानसभा समिति के सामने हो सकती है। इस घटना से अफसरशाही में तूफान आ सकता है। आइए जानते हैं विधायक के साथ बदसलूकी का पूरा मामला क्या है…
हापुड़। सदर विधायक को ब्लॉक में चाय पर बुलाकर अपमानित करने का मामला गंभीर होता जा रहा है। भाजपाइयों के अनुसार इस पूरे मामले में बीडीओ का तमाशबीन बने रहता साजिश की ओर इशारा कर रहा है। इसको विधायक सहित भाजपा संगठन ने गंभीरता से लिया है।
घटना को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताई है। उन्होंने विधायक से विस्तृत चर्चा की है। वहीं विधायक को लखनऊ बुलाया गया है। वहां पर मुख्यमंत्री से मुलाकात होगी। ऐसे में बीडीओ की पेशी विधानसभा समिति के सामने हो सकती है।
क्यों आधे घंटे तक नहीं आई चाय?
इस मामले को अंदरूनी राजनीति और जातिगत भेदभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे अफसरशाही में तूफान आ सकता है। सरकारी कार्यक्रम में सदर विधायक का ब्लॉक में पहुंचना। कार्यक्रम के बाद बीडीओ का विधायक से चाय के लिए बार-बार आग्रह करना। आधे घंटे तक चाय का नहीं आना।
जान से मारने धमकी…
वहीं चाय में देरी होने के बारे में पूछने पर एडीओ द्वारा विधायक से अभद्रता करना। जान से मारने और भुगत लेने की धमकी देने के साथ ही असभ्य भाषा का प्रयोग करना अनायास ही नहीं हुआ। इस पूरे हंगामे के दौरान बीडीओ का तमाशबीन बने रहना और अभद्रता कर रहे अपने अधीनस्थ को नहीं रोकना, कई सवाल खड़े कर रहा है।
यह सवाल अफसरों से होकर राजनीति तक और भाजपा की अंर्तकलह तक जा रहे हैं। इनका उत्तर सामने आएगा तो चाय के प्याले का तूफान कई गुल खिलाएगा। राजनीतिक परिदृश्य पर नजर डालें तो ब्लाक के ज्यादातर कार्य अभद्रता करने वाला बिशन सक्सेना ही देखता है। गढ़मुक्तेश्वर से भाजपा विधायक हरेंद्र तेवतिया की पत्नी ममता तेवतिया हापुड़ की ब्लाक प्रमुख हैं।
ब्लॉक में गढ़मुक्तेश्वर विधायक का था कार्यक्रम
ऐसे में बीडीओ श्रुति सिंह और एडीओ बिशन सक्सेना का विधायक हरेंद्र तेवतिया व ब्लॉक प्रमुख ममता तेवतिया से नियमित संपर्क रहता है। घटना के दिन 27 मार्च को भी सदर विधायक से ठीक पहले ब्लॉक में गढ़मुक्तेश्वर विधायक का कार्यक्रम था। उनको पूरा सम्मान दिया गया और प्रोटोकॉल के तहत नाश्ता कराया गया। उनके तत्काल बाद शहर विधायक विजयपाल आढ़ती पहुंचे और उनके साथ जबरदस्त अभद्रता की गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सवाल चाय का था ही नहीं। विधायक को प्रयास करके चाय के लिए रोका गया था और फिर अनावश्यक विलंब किया गया। विधायक ने केवल चाय में देरी का कारण पूछा था। इसमें ऐसा कुछ नहीं था कि अभद्रता की जाती। वहीं लगातार अभद्रता करने, गाली देने और हमला करने के लिए झपटने के बावजूद बीडीओ ने उसको रोकने का प्रयास तक नहीं किया।
क्या अभी तूल पकड़ेगा मामला?
ऐसे में घटना के पीछे राजनीति की सुगबुगाहट हापुड़ से लेकर लखनऊ तक है। पार्टी के जिले में एकमात्र दलित विधायक का चाय पर यह अपमान बड़ा तूफान ला सकता है। इससे अफसरों के साथ ही भाजपा के जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों की जवाबदेही बढ़ जाती है।
जिस प्रकार की नाराजगी विधानसभा अध्यक्ष सतीश मोहाना से व्यक्त की है, उससे स्पष्ट होता है कि मामला अभी तूल पकड़ेगा। विधायक विजयपाल आढ़ती ने बताया कि वह जिलाधिकारी द्वारा दिए गए पांच दिन के समय का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद अपने पत्ते खोलेंगे। वह जल्द ही लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।