Mutual Fund: 40 सालों से म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे निवेशक की अचानक हो गई मौत, अब किसे मिलेगा करोड़ों का फंड?
मुचुअल फंड में निवेश करना एक-दो दिन की बात नहीं, बल्कि सालों का खेल है। आप अगर आज पैसा लगाएंगे तो आपको 40-50 सालों बाद अच्छा खासा फंड तैयार मिलेगा। लेकिन निवेशकों के मन कई बार सवाल आता है कि अगर निवेशक की अचानक मौत हो जाए, तो जो पैसा वो सालों से जमा कर रहा है उसका क्या होगा?
क्या उस पैसे को नॉमिनी को दे दिया जाएगा, या परिवार को या फिर कानूनी उत्तराधिकारी को? और ये पैसा निकालने की प्रक्रिया क्या है? दरअसल निवेशक की मौत के बाद उसके द्वारा जमा किए गए पैसे को सही इंसान तक पहुंचाने की एक प्रक्रिया है जिसे 'ट्रांसमिशन ऑफ यूनिट्स' कहा जाता है। तो आइए जानते हैं कि ये क्या है और ये कैसे होता है।
ट्रांसमिशन क्या है?
जब किसी म्यूचुअल फंड निवेशक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके यूनिट्स को नॉमिनी, जीवित संयुक्त धारक या कानूनी वारिस के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को ट्रांसमिशन कहा जाता है। बिना ट्रांसमिशन के म्यूचुअल फंड कंपनी (AMC) किसी को भी पैसा नहीं दे सकती। ये प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यूनिट्स ट्रांसफर होती हैं या रिडेम्पशन का पैसा मिलता है।
यहां सबसे जरूरी ये है कि दावा करने वाले व्यक्ति का KYC अपडेट होना अनिवार्य है। अगर KYC नहीं है तो पूरा क्लेम प्रोसेस रुक जाएगा।
अगर निवेश संयुक्त नाम से है तो क्या होगा?
आजकल कई लोग अपनी पत्नी, बच्चे या परिवार के सदस्य के साथ संयुक्त फोलियो में निवेश करते हैं। ऐसे में इस केस में दो चीजें हो सकती हैं। अगर दूसरे या तीसरे होल्डर की मौत हो जाए तो उनका नाम फोलियो से हटा दिया जाता है। बाकी बचे होल्डर निवेश जारी रख सकते हैं। वहीं अगर मुख्य (First) होल्डर की मौत हो जाए तो दूसरा होल्डर अपने आप पहला होल्डर बन जाता है।
इसके लिए आपको कुछ जरूरी दस्तावेज जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, PAN कार्ड, बैंक डिटेल्स और KYC संबंधित कागजात जमा करने होते हैं। यदि क्लेम की राशि 5 लाख रुपये तक है तो बैंक मैनेजर द्वारा सिग्नेचर वैरिफिकेशन पर्याप्त होता है। लेकिन 5 लाख रुपये से अधिक के क्लेम में Notary Public या JMFC से हस्ताक्षर प्रमाणित करवाने पड़ते हैं।
नॉमिनी दर्ज है तो प्रक्रिया बहुत आसान
अगर आपने फोलियो में नॉमिनी का नाम दर्ज कर रखा है तो क्लेम प्रक्रिया काफी सरल हो जाती है। नॉमिनी को बस जरूरी दस्तावेज जमा करके यूनिट्स ट्रांसफर करवा लेने होते हैं या पैसा निकाल लेना होता है।
नॉमिनी नहीं है तो क्या?
अगर फोलियो में नॉमिनी दर्ज नहीं है तो प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो जाती है। राशि के अनुसार दस्तावेज अलग-अलग लगते हैं।
5 लाख रुपये तक के लिए रिश्तेदारी का प्रमाण, शपथ पत्र (Affidavit), Indemnity Bond और अन्य कानूनी वारिसों का No Objection Certificate (NOC) देकर क्लेम किया जा सकता है।
वहीं 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के लिए रजिस्टर्ड वसीयत या कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ सकती है।
10 लाख रुपये से ज्यादा की रकम के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, वसियत का प्रोबेट, प्रशासन पत्र या कोर्ट के आदेश जैसे मजबूत कानूनी दस्तावेज अनिवार्य हो जाते हैं।
AMC कैसे करती है जांच?
म्यूचुअल फंड कंपनी हर क्लेम की अच्छी तरह जांच करती है ताकि पैसा गलत हाथों में न जाए। इसलिए सही और पूरा दस्तावेज समय पर जमा करना बहुत जरूरी है। कंपनियां सारे दस्तावेज जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंक डिटेल, वसियत, इन सब की अच्छे से जांच करती हैं। साथ ही ट्रांसमिशन पूरा होने के बाद 10 कार्य दिवस का "Cooling Off Period" लागू होता है। यानी यूनिट्स ट्रांसफर होते ही उन्हें तुरंत रिडीम नहीं किया जा सकता।