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अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी... बॉर्डर पर तनाव के बीच भारत-बांग्लादेश ने लिए बड़े फैसले

प्रकाशित: June 12, 2026, 2:05 PM | राष्ट्रीय समाचार
अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी... बॉर्डर पर तनाव के बीच भारत-बांग्लादेश ने लिए बड़े फैसले

नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध प्रवासियों को लेकर चल रहे तनाव के बीच दोनों देशों ने अपनी साझा सीमा पर बेहतर इंटेलिजेंस शेयरिंग और तालमेल के साथ पेट्रोलिंग के जरिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह सहमति शुक्रवार को जारी एक संयुक्त बयान में दी गई।


दरअसल, बांग्लादेश ने भारतीय अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे बिना सही प्रक्रिया के प्रवासियों को बॉर्डर पार भेजने की कोशिश कर रहे हैं। इससे 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद संबंधों को स्थिर करने और बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की पहचान करके उन्हें वापस भेजने की भारत की व्यापक कोशिशों में मुश्किलें आ रही हैं।

चार दिवसीय बैठक के बाद लिया गया फैसला


नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुई चार दिवसीय बैठक हुई। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) और भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने बातचीत को सौहार्दपूर्ण, सकारात्मक और भविष्योन्मुखी बताया।


बैठक के बाद दोनों देशों ने शुक्रवार को एक संयुक्त बयान जारी करते हुए बताया कि भारत और बांग्लादेश सीमा पर अवैध, अनजाने में और जबरन होने वाली क्रॉसिंग' को रोकने के लिए समन्वित गश्त (Coordinated Patrols) बढ़ाएंगे और रीयल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करेंगे।


बता दें कि बांग्लादेश और भारत के बीच 4,000 किलोमीटर (2,500 मील) से ज्यादा लंबी सीमा है। यह दुनिया की सबसे लंबी सीमाओं में से एक है। बांग्लादेश से बार्डर वाले राज्य त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और असम में शासन करने वाली भारत की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी का कहना है कि बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की समस्या से निपटना एक प्राथमिकता है।


बीजेपी सरकार पिछले साल से ही बंगाली बोलने वाले मुसलमानों को गैर-कानूनी घुसपैठिया बताकर बांग्लादेश भेजने की कोशिश कर रही है। इसको लेकर बांग्लादेश का कहना है कि उसने इस प्रक्रिया को खत्म करने की मांग करते हुए नई दिल्ली को एक दर्जन से अधिक पत्र भेजे हैं।


बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने बताया कि उसने हाल के हफ्तों में ऐसी कई कोशिशों को नाकाम किया है और सीमावर्ती इलाकों में तैनाती, इंटेलिजेंस ऑपरेशन और ड्रोन निगरानी बढ़ा दी है।


वहीं, भारत ने मई में कहा था कि उसने ढाका से 2,860 से अधिक ऐसे लोगों की नागरिकता की पुष्टि करने को कहा है, जिनके पास कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है और जिन पर बांग्लादेशी नागरिक होने का शक है।


बिना सही प्रकिया के बांग्लादेश भेजना बिल्कुल मंजूर नहीं

गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबेद इस्लाम ने कहा कि बिना सही प्रक्रिया के लोगों को जबरन अंदर भेजना बिल्कुल मंजूर नही" है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है।


भारत-बांग्लादेश ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि मानव तस्करी, सीमा पर होने वाली मौतों, तस्करी, बुनियादी ढांचे और 'कोऑर्डिनेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट प्लान को लागू करने पर भी चर्चा की गई है।दोनों पक्षों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर शांति, स्थिरता और अमन-चैन बनाए रखने के अपने संकल्प को दोहराया। बयान के अनुसार, सीमा सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अगली बार नवंबर में ढाका में मिलेंगे।