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होम लोन से कराया दिव्यांश का इलाज... सामान्य बुखार बताते रहे डॉक्टर, मौत के सिरप से यूं हार गई मां

प्रकाशित: October 22, 2025, 9:55 AM | स्वास्थ्य
होम लोन से कराया दिव्यांश का इलाज... सामान्य बुखार बताते रहे डॉक्टर, मौत के सिरप से यूं हार गई मां

छिंदवाड़ा , परासिया (इकलहरा): मैंने उसके खिलौने, उसकी कॉपी किताबें, उसकी सारी यादें उसके साथ ही दफन कर दीं... किसी मां के मुंह से अपने बेटे के लिए ये शब्द दिल-दिमाग को कचोटने लगते हैं। सिर भन्ना उठता है, आखिर क्यों एक मां अपने बच्चे की यादें मिटाना चाहती है? लेकिन उस मां के दर्द की सीमा को महसूस करना नामुमकिन है, जिसने कुछ दिनों पहले ही अपना 3 साल का इकलौता बेटा खो दिया। दिवाली पर इन परिवारों का दर्द जानने नवभारत टाइम्स की टीम इनके घर पहुंची। दुनिया को जगमग करने वाले त्योहार पर इन घरों में अंधेरा छाया हुआ है।


दिव्यांश उइके (3 साल)... कफ सिरप से जान गंवाने वालों में इकलहरा का दिव्यांश भी शामिल था। दर्द की सीमा जब सहनशीलता से बाहर हो जाती है तो चेहरा पथरा जाता है। दिव्यांश की मां दीपिका का चेहरा इस वक्त ऐसा ही है... भावशून्य। दीपिका अपने बेटे के जन्मदिन को याद करते हुए कहती हैं। जब उसने दुनिया छोड़ी (4 सितंबर) तो ठीक 19 दिन बाद उसका बर्थडे था। एक महीने पहले से बर्थडे की रट लगाने लगा था। मम्मी इस बार बर्थडे गिफ्ट में साइकिल लूंगा। उसमें बैठकर ही स्कूल जाऊंगा। बार-बार याद दिलाता रहता था। अब किसे साइकिल दिलाऊं? खिलौनों से लेकर कॉपी-किताब तक मैंने तो उसकी सारी यादें उसके साथ ही दफन कर दीं। दादू से बहुत लाड़ करता था। वो भी कहीं जाते तो दिव्यांश को ले जाना साथ ले जाना कभी नहीं भूलते थे। अब रोज उसकी फोटो देखकर बस रोते रहते हैं। खुद को संभाल ही नहीं पा रहे हैं।


बाथरूम चोक हो गई, सांस लेने में भी दिक्कत थी

वो 'मनहूस दिन' याद करते हुए दीपिका कहती हैं- उसे (दिव्यांश) अचानक सर्दी-खांसी, जुकाम हुआ। परासिया के डॉ. ठाकुर के पास इलाज कराया। 26 अगस्त से 4 सितंबर तक ट्रीटमेंट चला। तीन दिनों तक डॉ. ठाकुर के पास दिखाते रहे। सामान्य बुखार था। ब्लड टेस्ट भी हुआ, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया कि क्या हुआ है। फिर हम उसे डॉक्टर प्रवीण सोनी के पास लेकर गए। वहां, फिर से ब्लड टेस्ट हुआ। बताया गया कि बच्चे की किडनी में इंजरी आ गई, इसलिए बाथरूम चोक हो गई है। सांस लेने में भी दिक्कत आ रही है।


दीपिका आगे बताती हैं- डॉ. प्रवीण सोनी ने छिंदवाड़ा रेफर किया। ट्रीटमेंट शुरू हुआ। लेकिन आराम लगने की जगह बच्चा और सीरियस हो गया। वहां से उसे नागपुर रेफर कर दिया गया। 2 सितंबर को हम लोग उसे लेकर नागपुर पहुंचे। इलाज चलता रहा, लेकिन कोई आराम नहीं लगा। अस्पताल में बच्चे पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था। 4 सितंबर की रात हमारा बच्चा शांत हो गया। हमें नहीं पता था कि हम दवाई के रूप में बच्चे को जगह दे रहे थे। मां (दीपिका) रोने लगती हैं। हमारी उतनी इनकम नहीं है। हमने घर के लिए लोन लिया था, उसी पैसे से बच्चे का इलाज कराया। हमारा तो बच्चा भी गया और सिर पर कर्जा भी हो गया। पति बुताई का काम करते हैं। जिंदगी अब मुश्किल है।


जिन लोगों की वजह से बेटा गया, उन्हें फांसी दो

दीपिका बताती हैं। कफ सिरप देने से पहले बच्चे की कंडीशन बिल्कुल ठीक थी। कफ सिरप देने के बाद उसे उल्टी चालू हो गईं। उल्टी कर-करके उसकी हालत ऐसी हो गई कि अपने बल पर बैठ भी नहीं पाता था। जहां पलंग पर सुला दो वहीं पड़ा रहता था। हाथ पैर एकदम लूज हो गए थे। पूरा शरीर शिथिल पड़ गया। न बैठ पा रहा था, न बोल पा रहा था। शुरुआती इलाज डॉक्टर ठाकुर ने किया। हर बार ब्लड टेस्ट होता था। सामान्य बुखार बताते थे। फिर मेरे बच्चे की जान कैसे चली गई? जिन लोगों की वजह से मेरा बेटा गया, उन्हें फांसी होना चाहिए। ताकी ऐसा किसी बच्चे के साथ न हो।


Curetesy

https://navbharattimes.indiatimes.com/state/madhya-pradesh/chhindwara/mp-chhindwara-parents-take-home-loan-for-treatment-but-divyansh-uikey-death-due-to-kidney-failure-know-full-story/articleshow/124693717.cms