सफल वार्ता का कड़वा अंजाम: बातचीत के बाद भी अमेरिका ने ईरान पर कसा शिकंजा, बढ़ाए आर्थिक प्रतिबंध
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में हुई सफल वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अचानक बढ़ गया। अमेरिका ने जहां ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए उसके साथ कारोबार करनेवाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ थोप दिया, वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका ने हमले किए तो उसके सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि जिन देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं, उन्हें इसे अपने ऊपर हमला नहीं समझना चाहिए। बता दें कि शुक्रवार को ओमान में सकारात्मक बातचीत के बाद दोनों देशों ने परोक्ष परमाणु वार्ता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
रॉयटर के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ अगले दौर की वार्ता के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगले हफ्ते बातचीत हो सकती है।
अरघची ने कहा कि बातचीत के लिए किसी तरह की धमकी और दबाव की रणनीति से दूर रहना चाहिए। तेहरान केवल परमाणु मुद्दे पर ही बात करेगा। ट्रंप ने नए टैरिफ आदेश से ईरान के कारोबार पर किया हमला वार्ता के बाद ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए उसके साथ कारोबार करनेवाले देशों पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ थोप दिया है।
आइएएनएस के अनुसार, व्हाइट हाउस ने पिछले साल जून में ईरान के परमाणु संयंत्रों पर किए गए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि ये हमले न हुए होते तो ईरान यूरेनियम संवर्धन गतिविधि नहीं रोकता। इस आदेश के जरिये ईरान को स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया गया है।
ईरान से वार्ता में पहली बार शामिल हुए अमेरिकी जनरल ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में हुई परोक्ष वार्ता में पहली बार अमेरिका के शीर्ष सैन्य कमांडर भी शामिल हुए। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के प्रमुख यूएस नेवी एडमिरल ब्रैड कूपर अपनी वर्दी में मस्कट पहुंचे। इसके जरिये अमेरिका ने ईरान को संदेश दिया कि अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और अन्य युद्धपोत अरब सागर में ईरानी तट के बेहद करीब मौजूद हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता बहुत अच्छी रही है, लेकिन अगर उन्होंने परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता नहीं किया तो इसके परिणाम बहुत गंभीर होंगे।
ईरानी परमाणु कार्यक्रम कितना खतरनाक एपी के अनुसार, पिछले साल जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले से पहले तक ईरान 60 प्रतिशत शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था, जो परमाणु बम बनाने के स्तर से महज एक तकनीकी कदम दूर था।
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) ने दावा किया था कि ईरान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो इस स्तर तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था, जबकि उसके पास परमाणु बम भी नहीं है। वहीं, ईरान लगातार अपनी परमाणु साइटों की जांच के आग्रहों को लगातार खारिज कर रहा है। इससे दुनिया की चिंता बढ़नी स्वाभाविक है।
मिस्त्र, तुर्किये और कतर ने ईरान से कहा है कि वह यूरेनियम संवर्धन को अगले तीन साल के लिए रोक दे और संवर्धित किया हुआ यूरेनियम किसी अन्य देश में भेजते हुए बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को स्थगित कर दे। वहीं रूस ने संकेत दिया है कि वह ईरान का यूरेनियम अपने पास रख सकता है, लेकिन ईरान ने इससे इनकार किया है।