कानपुर किडनी कांड: अली का दावा- सरगना रोहित ही करता था ऑपरेशन, अब तक 11 आरोपी भेजे जा चुके जेल
किडनी कांड की अहम कड़ी में शामिल मुदस्सर अली सिद्दकी उर्फ डॉक्टर अली ने गुरुवार को दिन भर चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस को गच्चा देकर अदालत पहुंचे 25 हजार के इनामी अली से दैनिक जागरण संवाददाता ने एक्सक्लूसिव बातचीत की।
इसमें उसने उस दावे को झूठा बताया, जिसमें कहा जा रहा था कि वह ऑपरेशन करता था। अली ने बताया कि गिरोह का सरगना रोहित ही ऑपरेशन करता था और वह इसमें केवल सहयोगी की भूमिका में था।
इस मामले के बाद हुआ खुलासा
केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में मुजफ्फरनगर की पारुल का 29 मार्च की रात किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। पारुल के लिए बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष ने किडनी बेची थी। इस प्रकरण का राजफाश पुलिस ने 30 मार्च को किया था।
मामले में अस्पताल की संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, आरोही अस्पताल के संचालक राजेश, मेडलाइफ के संचालक रामप्रकाश, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेन्द्र सिंह व दलाल शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाद में गाजियाबाद निवासी और खुद को डॉक्टर बताने वाले रोहित को भी गिरफ्तार किया गया।
इस मामले में गुरुवार से पहले तक 10 गिरफ्तारियां हो चुकी थीं और आठ आरोपित फरार थे। इनमें से मुदस्सर अली उर्फ डॉक्टर अली प्रमुख है, जिस पर आरोप है कि ओटी ऑपरेटर होने के बावजूद वह ऑपरेशन करता था।
अली ने कोर्ट में किया सरेंडर
अली ने गुरुवर को एसीजेएम-6 की कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण से पहले पुलिस ने अदालत में रिपोर्ट दाखिल नहीं की थी।
अली का आत्मसमर्पण कराने वाले अधिवक्ता मोहित द्विवेदी ने बताया कि पुलिस आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को रुकवाना चाहती थी, मगर अदालत के सख्त रुख के आगे पुलिस ने दोपहर बाद वांछित होने की रिपोर्ट दाखिल की, जिसके बाद अदालत ने अली को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
'गिरोह का सरगना रोहित करता था आपरेशन, मैं सिर्फ सहयोगी'
दैनिक जागरण संवाददाता से मुदस्सर अली ने लंबी बातचीत की। पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में प्लॉट नंबर 137, द्वितीय तल, गली नंबर 6, विश्वास पार्क निवासी अली से जब पूछा गया कि वह ओटी टेक्नीशियन होते हुए भी किडनी प्रत्यारोपण कैसे कर लेता था तो उसने ऑपरेशन के दावे को झूठा बताया।
उसने कहा कि उसका काम ओटी में डॉक्टर रोहित का सहयोग करना था। रोहित ही ऑपरेशन करता था। उसे नहीं पता है कि रोहित झोलाछाप है। उसने यह भी बताया कि उसे किडनी गिरोह में शामिल करने वाला रोहित ही था। वह मेरठ में रोहित से मिला और लालच में आकर इस गिरोह में शामिल हो गया।
एक ऑपरेशन के मिलते थे 40 हजार रुपये
बताया कि उसे एक ऑपरेशन पर केवल 40 हजार रुपये मिलते थे। करीब एक साल में उसने पांच-छह ऑपरेशन में सहयोग किया। मरीज व किडनी देने वाले को ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया कौन देता था?
इस पर उसने बताया कि रोहित भी एनेस्थीसिया का इंजेक्शन देता था और कभी-कभी राजेश और कुलदीप। गाजियाबाद में रहने वाला राजेश ओटी मैनेजर, जबकि हापुड़ निवासी कुलदीप ओटी इंचार्ज था। हालांकि वह केवल रोहित से जुड़ा था और अन्य को वह अधिक नहीं जानता है।